बीकानेर-खाजूवाला रूट पर जर्जर बसों की पोल खुली, बस में तकनीकी खराबी के बीच बिना सेफ्टी किट सफर कर रहे थे यात्री, ड्राइवर की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा।
Zeeupdate rajsthan News|Dalip nokhwal
खाजूवाला/बीकानेर।
बीकानेर से खाजूवाला के लिए रवाना हुई रोडवेज की जर्जर बस नंबर RJ07 PB 2265 में शुक्रवार सुबह बड़ा हादसा टल गया। रास्ते में बार-बार जलने की गंध आने के बावजूद बस चलती रही, लेकिन शोभासर टोल के पास बस रोककर देखा गया तो पिछले टायरों से धुआं उठ रहा था। देखते ही देखते बस के पीछे धुएं का गुबार छा गया और यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। चालक की सूझबूझ से समय रहते बस रोक दी गई, जिससे दर्जनों यात्रियों की जान बच गई।
घटना ने न केवल रोडवेज की तकनीकी लापरवाही उजागर की, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यात्रियों का आरोप है कि बस में न तो कोई फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशमन यंत्र) उपलब्ध था और न ही कोई सेफ्टी किट। ऐसे में अगर आग भड़क जाती तो यात्रियों के पास बचाव का कोई साधन नहीं था।

बस में सुरक्षा इंतजाम नदारद, यात्रियों में आक्रोश
प्रत्यक्षदर्शी यात्रियों के अनुसार बस में सीटों सीट सवारियां भरी हुई थीं। सुबह के समय कर्मचारी, व्यापारी और आम यात्री बड़ी संख्या में सफर करते हैं, इसी बीच तकनीकी खराबी और सुरक्षा संसाधनों के अभाव ने यात्रियों की चिंता और बढ़ा दी।
यात्रियों ने सवाल उठाया कि जब सार्वजनिक परिवहन में रोज हजारों लोग सफर करते हैं तो क्या फायर सेफ्टी उपकरण और इमरजेंसी किट जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं होनी चाहिए?
एक यात्री ने कहा, “अगर बस में आग लग जाती तो हम क्या करते? बस में न फायर यंत्र था, न कोई सुरक्षा किट। भगवान भरोसे सफर करवाया जा रहा है।”
टोल पर रुकी बस, धुएं से मची अफरा-तफरी
यात्रियों ने बताया कि बीकानेर से निकलने के बाद से ही जलने की गंध आ रही थी। शोभासर टोल के पास गंध तेज हुई तो बस रोकी गई, जहां पिछले टायरों से धुआं निकलता मिला। कुछ ही पलों में घबराहट का माहौल बन गया। यात्रियों का कहना है कि चालक ने समय रहते बस नहीं रोकी होती तो हादसा बड़ा हो सकता था।

डेढ़ घंटे गर्मी में परेशान रहे यात्री
बस खराब होने के बाद यात्रियों को दूसरी बस के इंतजार में करीब 1 से 1.30 घंटे तक सड़क किनारे गर्मी में बैठना पड़ा। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा परेशान रहे। सुबह 7 बजे रवाना हुई बस कुछ दूरी तय करने पर खराब हो गई उसके बाद दूसरी बस करीब 9:30 बजे रवाना हो सकी।
किराया नहीं लौटाया, कई यात्रियों को देना पड़ा दोबारा किराया
यात्रियों ने आरोप लगाया कि रोडवेज की ओर से किराया वापस नहीं लौटाया गया। देरी के चलते कई यात्रियों ने मजबूरी में निजी बसों का सहारा लिया और दोबारा किराया चुकाया। इससे यात्रियों में भारी नाराजगी रही।
शिकायत के बावजूद नहीं मिला जवाब
यात्रियों ने बताया कि घटना के बाद संबंधित नंबर 9549653242 पर संपर्क कर शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की गई, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
सरकार और रोडवेज प्रशासन से बड़ा सवाल
इस घटना ने एक गंभीर प्रश्न खड़ा कर दिया है जब सरकारी बसों में फायर यंत्र, सेफ्टी किट और आपातकालीन सुरक्षा इंतजाम तक नहीं हैं, तो यात्रियों की सुरक्षा आखिर कैसे सुनिश्चित होगी?
यात्रियों ने मांग की है कि खटारा और जर्जर बसों को तुरंत रूट से हटाया जाए,सभी रोडवेज बसों में फायर एक्सटिंग्विशर व सेफ्टी किट अनिवार्य की जाए ,खाजूवाला जैसे व्यस्त रूट पर अतिरिक्त और सुरक्षित बसें लगाई जाएं
खाजूवाला रूट पर लापरवाही कभी भी बन सकती है हादसे की वजह
बीकानेर-खाजूवाला रूट पर पहले भी बसों की खराब स्थिति को लेकर शिकायतें उठती रही हैं, लेकिन सुधार के दावे जमीनी हकीकत में नजर नहीं आते। इस बार ड्राइवर की सतर्कता से हादसा टल गया, लेकिन सवाल यही है कि क्या हर बार किस्मत साथ देगी?
यह घटना सिर्फ एक बस की खराबी नहीं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े सिस्टम की खामियों को उजागर करती है। अब देखना यह है कि सरकार और रोडवेज प्रशासन इस चेतावनी को गंभीरता से लेते हैं या नहीं।
